उत्तरकाशी I आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने कहा कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान को पहले ही माकूल जवाब दे दिया है। जरूरत पड़ने पर दुश्मनों को दोबारा जवाब दिया जाएगा। शुक्रवार को यहां सेना प्रमुख जनरल रावत ने पत्रकारों द्वारा पाकिस्तान की ओर से दी जा रही गीदड़ भभकियों को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में यह बात कही। उत्तरकाशी से गंगोत्री तक इको सेंसिटिव जोन के चलते ऑल वेदर रोड का निर्माण नहीं हो पाने से सामरिक तैयारियां प्रभावित होने के सवाल पर आर्मी चीफ ने कहा कि प्रकृति एवं विकास के बीच संतुलन कायम करने की जरूरत है।

हिमालय के नाजुक पर्यावरण तंत्र को बचाया जाना चाहिए, लेकिन यहां रहने वाले लोगों को बिजली, सड़क जैसी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए, ताकि वह भी विकास की दौड़ में शामिल हो सकें। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती चौकियों तक संसाधन पहुंचाने के लिए भारतीय सेना के पास अत्याधुनिक तकनीकें मौजूद हैं। हमारे जवान दुर्गम रास्तों को लांघ कर सीमाओं तक पहुंचने और उनकी रक्षा करने में सक्षम हैं। 

अपने ननिहाल थाती धनारी पहुंचे आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने सभी प्रवासी उत्तराखंडियों से शहरों से लौटकर अपने गांवों का विकास करने की अपील की है। पत्रकारों से वार्ता में आर्मी चीफ ने कहा कि वह वर्षों से अपने ननिहाल आना चाहते थे, लेकिन नौकरी की जिम्मेदारियों के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका। आज उनका वर्षों पुराना सपना पूरा हो गया है। हालांकि अब वह जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं, इसके बाद वह लगातार अपने ननिहाल और पौड़ी स्थित पैतृक गांव में आते रहेंगे, ताकि अपने अनुभव का प्रयोग कर वह इन दोनों गांवों के विकास में योगदान दे सकें।

जनरल रावत ने कहा कि शहरों से उलट पहाड़ों में प्रकृति ने कई नेमतें दी हैं। खासकर देवभूमि उत्तरकाशी में तो लोगों को मां गंगा का जल पीने और जीवन के अंत में इसी में समा जाने का सौभाग्य मिला है। हालांकि मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण लोगों को मजबूरन पलायन करना पड़ रहा है। ऐसे में अगर सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार संबंधी संसाधन तैयार करे तो लोग गांवों में ही खुशी-खुशी रह सकेंगे। अब पहाड़ के गांवों तक सड़क एवं विकास पहुंचता दिख रहा है।
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