देहरादून। हरिद्वार-देहरादून राजमार्ग को चौड़ा करने में असफल रहने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने जिस एरा इंफ्रा कंपनी को बाहर का रास्ता दिखा दिया, उसके बनाए आधे-अधूरे ढांचों की गुणवत्ता की परतें अब उधड़ने लगी हैं। इन ढांचों में तीन एलीफैंट अंडरपास, एक रेलवे अंडर ब्रिज, एक फ्लाईओवर व तीन बड़े पुल शामिल हैं। जिन दो कंपनियों को अवशेष ढांचों व चौड़ीकरण कार्य को पूरा करने का जिम्मा अब सौंपा गया है, वह निर्माण की ऐसी हालत देखकर चकरा रही हैं। क्योंकि निर्माण कार्यों में अलग-अलग स्तर पर खामियां सामने आ रही हैं।
वर्ष 2010 से अधर में लटके हरिद्वार-देहरादून राजमार्ग को फोरलेन करने का काम एरा इंफ्रा से छीन लिए जाने तक यह कंपनी करीब 300 करोड़ रुपये के काम कर चुकी थी। प्रगति के नाम पर पूर्व की कंपनी ने सीमेंट और लोहे के बड़े-बड़े ढांचे तो खड़े कर दिए, मगर इन्हें बीच में ही छोड़ दिया। सालों से इन ढांचों का रखरखाव भी नहीं किया जा सका। इस कारण कहीं लोहे पर जंग लग गया है, तो कहीं कंक्रीट खराब होने लगी है। इसके अलावा जो कंपनी अब इनका काम आगे बढ़ा रही हैं, उन्होंने पाया कि फ्लाईओवर व पुल बनाने के लिए जहां गार्डर रखे गए हैं, उनमें बेरिंग ही नहीं लगाई गई। जिसके चलते वह झुक गए हैं। इसके साथ ही पुलों की दीवारों के लिए खड़े किए गए पुश्तों में पानी भर जाने से वह बाहर की तरफ निकल रहे हैं। ऐसे में सबसे पहले नई कंपनियां पुराने ढांचों की मरम्मत में जुटी हैं, ताकि स्पष्ट हो सके कि कहां-कहां क्रैक आ गए हैं या कहां लोहा टिल्ट हो गया है। इस काम में अनावश्यक समय खराब हो रहा है। जिम्मेदार कंपनियों को यह चिंता भी सता रही है कि ऐसे में समय पर काम कैसे पूरा होगा।


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