मैं कभी भी इन चीजों के बारे में नहीं सोचता हूं। इसके लिए समय बर्बाद नहीं करता। इस राज्य की स्थापना से ही राजनीतिक अस्थिरता रही है। इससे लोगों के मन में राजनीतिक अस्थिरता बस गई है। मैंने जब कार्यभार संभाला था तब से हटने की चर्चाएं चल रही थीं। मैंने सोचा था कि इस प्रदेश में कई ऐसे मिथक बन गए हैं, जिन्हें तोड़ना है और गुजरते वक्त के साथ यह मिथक टूटेंगे। सरकार अच्छा काम कर रही है। ईमानदारी से काम कर रही हैं। इस बीच पांच चुनाव हुए पांचों भाजपा ने जीते हैं। जनता की कसौटी में हम खरे उतरे हैं।
मुख्यमंत्री के तौर पर सबसे चुनौती भर फैसला क्या रहा?
पार्टी के विजन डाक्यूमेंट में जो जनता से वायदे किए हैं, उनमें से 75 प्रतिशत पूरे कर दिए। कई काम विजन डाक्यूमेंट से इतर भी किए हैं। मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि यह कार्य नहीं हो सकता। गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का बड़ा निर्णय हमने लिया। देवस्थानम बोर्ड का निर्णय आसान नहीं था। 2004 से इस पर विचार चल रहा था, लेकिन मामूली से विरोध पर सरकारें बैकफुट पर चली जाती थीं। सरकार को लगा कि अगर चारधाम यात्रा सहित तीर्थाटन में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देनी हैं तो बोर्ड गठित करना होगा। आज चार धाम देवस्थानम बोर्ड अगर गैरसैंण के बाद माना जाए तो सबसे बड़ा फैसला है।
चर्चा है कि जनता के बीच आपकी अड़ियल मुख्यमंत्री की छवि है। मौजूदा सियासत में ऐसी छवि कितनी सही है?
राजनीति में अड़ियल होना बहुत जरूरी है। सही बात और सही काम के लिए अगर कोई बाधाएं आती हैं तो उसमें अड़ना भी चाहिए। उसका मकसद और उद्देश्य सकारात्मक होना चाहिए। कोई चीज शुद्ध है तो उसे करना चाहिए। हो सकता है कि उस समय वो बात किसी को कड़वी लगे, लेकिन भविष्य में उसके परिणाम बेहतर आ सकते हैं। तो हमें राजनीति के चलते निर्णय बदलना नहीं बल्कि अडिग होकर लेना चाहिए।
कोरोना संकट के बीच कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त नहीं होने को सरकार की कूटनीतिक विफलता मानते हैं?
- नहीं कोई कूटनीतिक विफलता नहीं है। कर्मचारियों का रुख नकारात्मक है। मैंने उनसे दो मार्च की रात को वार्ता की। उन्हें आंदोलन को वापस लेना चाहिए था। वे जिस तरह का रुख अपनाएं हुए हैं, उससे न तो राज्य और न उनका भला होने वाला है। जिस तरह से महामारी दस्तक दे रही है, उसमें कर्मचारियों को स्वेच्छा से आंदोलन समाप्त करना चाहिए।
क्या सरकार कड़े फैसले नहीं लेने से बच रही है?
सरकार को जो फैसले लेने हैं वो लिए जाएंगे, लेकिन कर्मचारियों का जो अड़ियल रुख है उसे उन्हें ठीक करना होगा। जब हमने उनसे कहा कि सरकार की सोच सकारात्मक है। तो उन्हें मानना चाहिए था। ऐसा नहीं इस मसले का समाधान नहीं है। समाधान है और किया जाएगा, लेकिन आंदोलन पर अड़ना उचित नहीं है।
सरकार के अंतिम दो वर्षों में क्या रोडमैप लेकर बढ़ेंगे?
अगले दो साल का समय बेहद महत्वपूर्ण है। विकास की दिशा में जो हमने कदम बढ़ाए हैं, उनको और आगे लेकर जाना है। इस प्रदेश का भविष्य पर्यटन है। उस दिशा में बढ़ रहे हैं। दो समिट हम आयोजित करने वाले थे, लेकिन कोरोना के कारण स्थगित किया। हमने युवा आयोग बनाया। युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना। बेरोजगारों के लिए रोजगार के अवसर मुहैया करना, हमारी प्राथमिकता है। सरकारी नौकरियों में और भर्तियां निकाली जाएंगी। गरीब समाज को सशक्त करने के लिए प्रयास होंगे। राज्य में अटल आयुष्मान योजना शुरू की। समय पर उसमें बदलाव किए। कर्मचारियों को योजना शामिल किया। दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना बड़ी चुनौती भी है और लक्ष्य भी।
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