देहरादून I उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया। इस दौरान उन्होंने कई बड़े फैसले लिए तो कुछ चुनौतियां भी झेलीं। गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने के निर्णय के साथ चारधाम देवस्थानम बोर्ड गठन को वह सबसे बड़ा फैसला मानते हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति को वह अपनी बड़ी उपलब्धि मानते हैं। उनका कहना है कि राजनीति में अड़ियल होना जरूरी है।
त्रिवेंद्र अपनी सरकार के लिए अगले दो साल बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं। इस दौरान वह पर्यटन सेक्टर को विकसित करने, बेरोजगारों को रोजगार देने के साथ दूरस्थ इलाकों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत उत्तराखंड में भाजपा के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो तीन साल का कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं। आज से ठीक तीन साल पहले त्रिवेंद्र ने उत्तराखंड के आठवें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।

अपने तीन साल के कार्यकाल को किस तरह से देखते हैं? 

चुनाव जीतने से पहले भ्रष्टाचार सबसे बड़ा मुद्दा था। वन, खनन, शराब और ट्रांसफरों में सरकारी भ्रष्टाचार व्याप्त था। भ्रष्टाचारियों को सरकारी संरक्षण मिला हुआ था। हमने तय किया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस रहेगा। सरकार बनने के बाद एनएच 74 घोटाले की जांच करवाई। कई पीसीएस और अन्य अधिकारियों को जेल भेजा। दो आईएएस अफसरों को सस्पेंड किया। सरकार तीन साल में डेढ़ सौ से अधिक भ्रष्ट लोगों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है। 

अगर उपलब्धियों की बात की जाए तो सरकार की परफार्मेंस कैसी रही? 
बुनियादी सुविधाओं के विकास में रिकार्ड काम हुए हैं। सड़क, बिजली, पानी की समस्या, बढ़ती महंगाई पर काबू पाने में सरकार ने बेहतर काम किया। स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हुआ। सरकारी अस्पतालों में पिछले 17 सालों में डाक्टरों की संख्या को 1100 से बढ़ाकर ढाई हजार किया। जिला अस्पतालों में आईसीयू सेंटर बनाए। स्वास्थ्य संकेतकों में व्यापक सुधार हुआ है। शिक्षा में एनसीआरटी की किताबें शुरू की। कोर्ट के आदेश से शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया रुकी थी, जिस पर अब निर्णय आने से भर्तियां होंगी। सीपेट खोला गया, जिसमें प्रशिक्षण लेने के बाद शत प्रतिशत रोजगार मिलता है। पौने दो सौ करोड़ से देश की पांचवीं साइंस सिटी देहरादून में बन रही है। जल संरक्षण के क्षेत्र में बड़ा काम हुआ। वर्षों से लंबित जमरानी बांध योजना को मंजूरी मिल गई है। सूर्यधार बांध निर्माण अंतिम स्टेज पर है। सौंग बांध जल्द आकार लेगा। 

और किन क्षेत्रों पर फोकस रहा? 
- सरकार का बड़ा फोकस किसानों पर रहा। एक लाख तक ब्याज मुक्त ऋण की सुविधा दे रहे हैं। समूह में किसानों को पांच लाख तक ब्याज मुक्त ऋण की सुविधा है। जैविक खेती की दिशा में नए क्लस्टर विकसित कर बड़ा कदम उठाया है। डेयरी में 25 प्रतिशत सब्सिडी दे रहे हैं। अल्मोड़ा में डेमस्क गुलाब की खेती का क्लस्टर शुरू किया है। नशा रहित भांग की खेती किसानों की आर्थिकी मजबूत करेगी। गन्ना किसानों के बकाया भुगतान सरकार ने किए। इसके अलावा चीनी मिलों में एथनॉल प्लांट लगाए जा रहे हैं। पर्यटन में सरकार ने 13 जिले 13 डेस्टिनेशन शुरू किया। एयर कनेक्टिविटी में नई उड़ाने शुरू हुई। जौलीग्रांट से पहले 12 उड़ाने थी, जो अब बढ़कर 22 हो गई हैं। जल्द छह और उड़ाने शुरू हो रही हैं। ऑल वेदर रोड और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर तेजी से काम चल रहा है। देवबंद रुड़की रेलमार्ग पर जल्द काम शुरू होगा। एनसीसी अकादमी का शिलान्यास हो गया है। दून में सैन्य धाम बनने जा रहा है। 

कोशिशों के बावजूद कृषि विकास दर में क्यों बढ़ोतरी नहीं हो रही? 
इसका बड़ा कारण हैं कि प्रदेश में पारंपरिक खेती प्रकृति पर निर्भर करती है। सिंचित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। नए क्षेत्रों पर काम किया जा रहा है। सुगंधित पौधों, फ्लोरीकल्चर, मत्स्य पालन में कई योजनाएं किसानों की आर्थिकी को बढ़ाने में काम कर रहे हैं। यह प्रयास कुछ वर्षों में किसानों की आय बढ़ाने में कारगर साबित होंगे। 

मुख्यमंत्री पद से बार बार हटाये जाने चर्चा को कैसे लेते हैं? 

मैं कभी भी इन चीजों के बारे में नहीं सोचता हूं। इसके लिए समय बर्बाद नहीं करता। इस राज्य की स्थापना से ही राजनीतिक अस्थिरता रही है। इससे लोगों के मन में राजनीतिक अस्थिरता बस गई है। मैंने जब कार्यभार संभाला था तब से हटने की चर्चाएं चल रही थीं। मैंने सोचा था कि इस प्रदेश में कई ऐसे मिथक बन गए हैं, जिन्हें तोड़ना है और गुजरते वक्त के साथ यह मिथक टूटेंगे। सरकार अच्छा काम कर रही है। ईमानदारी से काम कर रही हैं। इस बीच पांच चुनाव हुए पांचों भाजपा ने जीते हैं। जनता की कसौटी में हम खरे उतरे हैं। 
 
मुख्यमंत्री के तौर पर सबसे चुनौती भर फैसला क्या रहा? 
पार्टी के विजन डाक्यूमेंट में जो जनता से वायदे किए हैं, उनमें से 75 प्रतिशत पूरे कर दिए। कई काम विजन डाक्यूमेंट से इतर भी किए हैं। मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि यह कार्य नहीं हो सकता। गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का बड़ा निर्णय हमने लिया। देवस्थानम बोर्ड का निर्णय आसान नहीं था। 2004 से इस पर विचार चल रहा था, लेकिन मामूली से विरोध पर सरकारें बैकफुट पर चली जाती थीं। सरकार को लगा कि अगर चारधाम यात्रा सहित तीर्थाटन में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देनी हैं तो बोर्ड गठित करना होगा। आज चार धाम देवस्थानम बोर्ड अगर गैरसैंण के बाद माना जाए तो सबसे बड़ा फैसला है। 

चर्चा है कि जनता के बीच आपकी अड़ियल मुख्यमंत्री की छवि है। मौजूदा सियासत में ऐसी छवि कितनी सही है? 
 राजनीति में अड़ियल होना बहुत जरूरी है। सही बात और सही काम के लिए अगर कोई बाधाएं आती हैं तो उसमें अड़ना भी चाहिए। उसका मकसद और उद्देश्य सकारात्मक होना चाहिए। कोई चीज शुद्ध है तो उसे करना चाहिए। हो सकता है कि उस समय वो बात किसी को कड़वी लगे, लेकिन भविष्य में उसके परिणाम बेहतर आ सकते हैं। तो हमें राजनीति के चलते निर्णय बदलना नहीं बल्कि अडिग होकर लेना चाहिए। 

कोरोना संकट के बीच कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त नहीं होने को सरकार की कूटनीतिक विफलता मानते हैं? 
- नहीं कोई कूटनीतिक विफलता नहीं है। कर्मचारियों का रुख नकारात्मक है। मैंने उनसे दो मार्च की रात को वार्ता की। उन्हें आंदोलन को वापस लेना चाहिए था। वे जिस तरह का रुख अपनाएं हुए हैं, उससे न तो राज्य और न उनका भला होने वाला है। जिस तरह से महामारी दस्तक दे रही है, उसमें कर्मचारियों को स्वेच्छा से आंदोलन समाप्त करना चाहिए।

क्या सरकार कड़े फैसले नहीं लेने से बच रही है? 
 सरकार को जो फैसले लेने हैं वो लिए जाएंगे, लेकिन कर्मचारियों का जो अड़ियल रुख है उसे उन्हें ठीक करना होगा। जब हमने उनसे कहा कि सरकार की सोच सकारात्मक है। तो उन्हें मानना चाहिए था। ऐसा नहीं इस मसले का समाधान नहीं है। समाधान है और किया जाएगा, लेकिन आंदोलन पर अड़ना उचित नहीं है। 

सरकार के अंतिम दो वर्षों में क्या रोडमैप लेकर बढ़ेंगे? 
अगले दो साल का समय बेहद महत्वपूर्ण है। विकास की दिशा में जो हमने कदम बढ़ाए हैं, उनको और आगे लेकर जाना है। इस प्रदेश का भविष्य पर्यटन है। उस दिशा में बढ़ रहे हैं। दो समिट हम आयोजित करने वाले थे, लेकिन कोरोना के कारण स्थगित किया। हमने युवा आयोग बनाया। युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना। बेरोजगारों के लिए रोजगार के अवसर मुहैया करना, हमारी प्राथमिकता है। सरकारी नौकरियों में और भर्तियां निकाली जाएंगी। गरीब समाज को सशक्त करने के लिए प्रयास होंगे। राज्य में अटल आयुष्मान योजना शुरू की। समय पर उसमें बदलाव किए। कर्मचारियों को योजना शामिल किया। दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना बड़ी चुनौती भी है और लक्ष्य भी।
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