देहरादून । ट्रैक्टर के इंश्योरेंस के फर्जी दस्तावेज बनाने के मामले में पुलिस ने एजेंट के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। ट्रैक्टर मालिक की शिकायत पर ही आरटीओ में रिश्वतखोरी पकड़ी गई थी। इसीलिए मामले में कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ कर्मचारियों ने ही ट्रैक्टर मालिक को दफ्तर के बाहर बैठने वाले आरोपी एजेंट के पास भेजा था।
ट्रैक्टर मालिक अधोईवाला निवासी जुल्फिकार ने डालनवाला थाने में दर्ज कराए मुकदमे में बताया कि उन्होंने ट्रैक्टर का पंजीकरण कृषि से व्यवसायिक श्रेणी में कराने के लिए आरटीओ में आवेदन किया था। कर्मचारियों के बताने पर जुल्फिकार ने आरटीओ आफिस के बाहर एजेंट सिद्धांत से 18 नवंबर 2019 को ट्रैक्टर का इंश्योरेंस कराया था।

उन्होंने 19 नवंबर को इंश्योरेंस के कागजात आरटीओ आफिस में जमा कराए थे। इसी बीच पंजीक रण के बदले छह हजार रुपये की मांग करने पर जुल्फिकार ने विजिलेंस से शिकायत की थी। इसी आधार पर विजिलेंस ने संभागीय परिवहन अधिकारी के आफिस के एक बाबू और दो दलालों को गिरफ्तार किया था। 

पीड़ित जुल्फिकार का कहना है कि तीन फरवरी को एआरटीओ की तरफ से उन्हें नोटिस मिला कि इंश्योरेंस के कागजात फर्जी है। इस पर उन्होंने एजेंट से बात की तो वह ना-नुकूर करने लगा। एसएसपी/डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने शिकायत का संज्ञान लेकर डालनवाला पुलिस को मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया था।

ट्रैक्टर के फर्जी इंश्योरेंस का मामला बेहद गंभीर है। एजेंट और आरटीओ कर्मचारियाें की भूमिका की जांच की जा रही है। विवेचना में आने वाले साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस मामले में तह तक जाकर कार्रवाई करेगी।  
अरुण मोहन जोशी, डीआईजी
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