देहरादून। मंत्रियों का आयकर सरकार की ओर से चुकाने की व्यवस्था उत्तराखंड में समाप्त होने जा रही है। मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों के हामी भरने पर सरकार ने इस व्यवस्था को खत्म करने का फैसला लिया है। इस संबंध में अगली कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव लाया जा रहा है।
अब तक इस व्यवस्था से लाभान्वित हो रहे सभी मंत्री भविष्य में अपने आयकर का भुगतान स्वयं करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष भी इसके दायरे में आएंगे। अविभाजित उत्तर प्रदेश में तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के कार्यकाल के दौरान वर्ष 1981 में यह व्यवस्था आरंभ की गई थी कि सभी मंत्रियों का आयकर सरकार चुकाएगी।
यह व्यवस्था अलग राज्य बनने के बाद पिछले 19 सालों से उत्तराखंड में भी बदस्तूर चल रही है। 38 साल पुरानी इस अप्रासंगिक व्यवस्था की जानकारी पाठकों को दी थी। इस पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सरकार द्वारा मंत्रियों का आयकर चुकाने की व्यवस्था की समीक्षा करने और अपने मंत्रियों से राय मशविरा करने की बात कही।
मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों ने अपनी राय से मुख्यमंत्री को अवगत करा दिया है। 'दैनिक जागरण' से बातचीत में भी मंत्रियों ने अपनी इच्छा जाहिर की। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, यशपाल आर्य, मदन कौशिक, डॉ. हरक सिंह रावत, अरविंद पांडेय, सुबोध उनियाल ने कहा कि वह अब आपना आयकर का भुगतान खुद करेंगे।
सतपाल महाराज और मदन कौशिक का तो कहना है कि वे स्वयं ही अपना आयकर भरते हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने कहा कि वह भी अपने आयकर का स्वयं ही भुगतान करेंगी।
गौरतलब है कि मंत्रियों का आयकर अब तक सरकार, तो विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष का आयकर चुकाने की जिम्मेदारी विधानसभा निभाती आ रही है। मंत्रियों को वर्तमान में प्रति माह लगभग 4.40 लाख रुपये वेतन और भत्तों के रूप में मिल रहे हैं।


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