देहरादून । उत्तराखंड में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के बहाने अब कांग्रेस विधायक दल में खींचतान है। कुछ विधायकों ने तय कर लिया है कि नेता प्रतिपक्ष को हटाया जाए। इसके लिए ये विधायक तीन फरवरी को दिल्ली में कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मुलाकात करेंगे। 
नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश और धारचूला विधायक हरीश धामी के बीच विवाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी के गठन को लेकर सामने आ चुका है। धामी कह भी चुके हैं कि नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ हाईकमान से बात की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ मोर्चाबंदी को इन विधायकों ने अंतिम रूप भी दे दिया है।

सभी विधायक आपस में संपर्क में हैं और तय किया है कि तीन फरवरी को दिल्ली में एक साथ कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के बारे में बात की जाएगी। इस मुहिम में इन विधायकों ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और जागेश्वर विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल को शामिल नहीं किया है।

एक विधायक के मुताबिक कुंजवाल वरिष्ठ कांग्रेसी हैं लिहाजा उन्हें किनारे ही रखा है। माना जा रहा है कि इसके पीछे रणनीति यह है कि यह मामला इंदिरा हृदयेश बनाम हरीश रावत न हो जाए। विधायक दल के उपनेता करन माहरा का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष की ओर से विधायकों से राय नहीं ली जा रही है। प्रदेश में कांग्रेस के 11 विधायक हैं। अभी तक नेता प्रतिपक्ष के पक्ष में कोई विधायक खुलकर सामने नहीं आया है।

नेता प्रतिपक्ष की ओर से वेट एंड वाच की रणनीति

नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश इस मामले में कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। सूत्रों के मुताबिक इंदिरा कैंप इस मामले को लेकर खास दबाव में नहीं है। कैंप का मानना है कि धामी के नाम को बदलने का मामला एआईसीसी के स्तर पर हुआ है। विधायक अगर दिल्ली जाते हैं तो हरीश धामी के नाम के बहाने इंदिरा और प्रीतम भी दिल्ली की ओर रुख करेंगे। 

विधायकों की अनदेखी हो रही है: माहरा 
विधायक दल  के उपनेता करण माहरा का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष को हरीश शब्द से पता नहीं क्या चिढ़ है? पहले हरीश रावत और अब हरीश धामी। प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह कह चुके हैं कि पीसीसी की सूची में हरीश धामी को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया था।
 
फिर कैसे वे प्रदेश सचिव बना दिए? दो बार के विधायक के साथ ऐसा करना सही नहीं है। अगर यह हो भी गया था तो सूची जारी होने से पहले एक बार भी नाम नहीं देखा गया। हाईकमान से इस बात की शिकायत की जाएगी कि विधायकों से कोई राय नहीं ली जा रही है। सात विधायक शिकायत करेंगे।
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