चंपावत । कोरोना वायरस के खतरों के मद्देनजर चीनी नागरिकों के नेपाल के रास्ते भारत आने पर रोक लगा दी गई है। अब भारत आने वाले चीनी नागरिकों को चीन सरकार के पत्र पर केवल दिल्ली एयरपोर्ट पर आने की सुविधा दी जाएगी, जहां उन्हें सेना और आईटीबीपी की कड़ी सुरक्षा में मेडिकल आबजर्वेशन में 14 दिन रखा जाएगा।
बीते दिवस मंगलवार को नेपाल के जरिए भारत आ रहे चीनी नागरिक को लौटा दिया गया था। सीएमओ डा. आरपी खंडूरी ने बताया कि कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए नेपाल के रास्ते भारत में प्रवेश पर रोक लगाई गई है।

अब नेपाल के सड़क मार्ग से कोई भी चीनी नागरिक भारत में प्रवेश नही कर सकेगा। वे केवल हवाई मार्ग से दिल्ली आ सकेंगे, जहां उन्हें 14 दिन तक आइसोलेशन सेंटर में रहना होगा। बता दें कि उत्तराखंड में केवल बनबसा ही थर्ड कंट्री (भारत नेपाल को छोड़कर) के नागरिकों और पर्यटकों के आवागमन का वैधानिक मार्ग है। राज्य में बनबसा में ही इमिग्रेशन चेकपोस्ट स्थापित है। 

चीन निवासी फैक्ट्री कर्मी को नहीं मिला प्रवेश

मंगलवार को नेपाल के रास्ते भारत आ रहे चीनी नागरिक सुन यून कैन को बनबसा बार्डर पर मेडिकल परीक्षण के बाद लौटा दिया गया था। वह सितारगंज सिडकुल की एक कंपनी में काम करता है। बताया जा रहा है कि कैन छह जनवरी को दिल्ली से चीन गए थे, जिसके बाद नौ फरवरी को काठमांडू आए।

बीते दिवस 11 फरवरी को बनबसा बार्डर पहुंचे। स्वास्थ्य महकमे के निर्देश पर उक्त कंपनी में काम करने वाले अन्य चीनी नागरिकों के भी चीन जाने-आने की जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही उनका परीक्षण करने के भी निर्दश दिए गए हैं।

उठी मांग : कर्मचारियों की सुरक्षा के भी हों पुख्ता इंतजाम
चीन में फैले कोरोना वायरस के खतरों से बचाव के लिए नेपाल से आने वालों की सघन जांच के निर्देश दिए गए हैं, किंतु भारत नेपाल सीमा पर एसएसबी, इमिग्रेशन चेकपोस्ट, कस्टम, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों की पूर्ण सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की गई है। गौरव सेनानी कल्याण समिति अध्यक्ष कै. भानी चंद ने कहा कर्मियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए उन्हें तत्काल सुरक्षा कवच, मास्क, ग्लब्स आदि मुहैया कराए जाने चाहिए।
Share To:

Post A Comment: