देहरादून I उत्तराखंड के वित्तीय वर्ष 2020-21 का 53 हजार करोड़ रुपये का बजट बुधवार को बिना चर्चा के ही पास हो जाएगा। मंगलवार को देर शाम हुई कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में बुधवार को सदन में सिर्फ वित्त विनियोग विधेयक ही लेकर आना ही तय किया गया। विधानसभा में कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में तय किया गया कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए एक ही दिन का सत्र आयोजित किया जाए। 25 मार्च की कार्यवाही के दौरान सिर्फ वित्त विनियोग विधेयक पारित किया जाएगा।
शून्य काल और प्रश्नकाल भी नहीं होगा। वित्त विनियोग विधेयक को ही सामान्य रूप से बजट कहा जा सकता है। सरकार ने भराड़ीसैंण में चार मार्च को बजट पेश किया था और बजट पर कुछ हद तक चर्चा भी हुई थी। प्रदेश सरकार इस बार करीब 53 हजार करोड़ रुपये का राजस्व सरप्लस बजट लेकर आई थी। इसके साथ ही विभागों के बजट को भी सदन से स्वीकृति बुधवार को ही मिल जाएगी।

राज्यपाल और दर्शक दीर्घा पर भी प्रतिबंध
कार्यमंत्रणा समिति ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए राज्यपाल और दर्शक दीर्घा पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। इससे अब सदन की कार्यवाही देखने के लिए लोग नहीं आ सकेंगे। समिति ने यह भी तय किया कि अधिकारियों की संख्या भी सीमित की जाए। सदन में मंत्रियों से पूछे गए सवालों का जवाब देने के लिए सामान्य रूप से अधिकारी उपस्थित रहते हैं।

मीडिया को सूचना विभाग देगा जानकारी
स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह भी तय किया गया कि सदन की कार्यवाही की जानकारी मीडिया को सूचना विभाग उपलब्ध कराएगा। यह शायद पहली बार होगा कि मीडिया भी सदन की कार्यवाही से दूर रहेगा।

कोरोना संक्रमण को देखते हुए बजट पास कराना जरूरी है। विभागों की अनुदान मांगें आएंगी लेकिन विपक्ष कट मोशन नहीं लाएगा। जिन बातों पर सदन में सरकार का ध्यान विपक्ष खींचना चाहता था, उन मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री से बात हो गई है।
- इंदिरा हृदयेश , नेता प्रतिपक्ष

सभामंडप में डेढ़ मीटर के फासले पर बैठेंगे विधायक

बुधवार को होने वाले बजट सत्र के दौरान सभा मंडप में विधायक डेढ़ मीटर के फासले पर बैठेंगे। कोरोना वायरस से बचाव के लिए विधानसभा में सोशल डिस्टेंसिंग पर खास जोर है। यही वजह है कि विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने सदस्यों को वायरस से बचाव को लेकर एक एडवाइजरी भी जारी की है। सरकार के मंत्री से लेकर राजनीतिक दलों के विधायक तथा प्रदेश सरकार के अधिकारियों व कर्मचारियों में कोरोना वायरस को लेकर भारी दहशत है। प्रदेश सरकार की कोरोना संक्रमण के संकट से बचाव के लिए लगातार स्थिति पर नजर है। ऐसे में सरकार का प्रयास है कि किसी भी तरह 2020-21 के बजट को पास करा दिया जाए, ताकि अप्रैल माह में सभी विभागों को समय पर बजट जारी हो सके।

सरकार सत्र के दौरान संक्रमण के खतरे को लेकर भी चिंता में है। इसीलिए यह प्रयास हो रहा है कि सदन में सदस्यों की इतनी संख्या हो कि कोरम पूरा हो जाए। इसके लिए सरकार पूरी तरह से मन बना चुकी है। भाजपा के उन विधायकों पर सदन में उपस्थिति को लेकर दबाव नहीं बनाया गया है जो पर्वतीय और सीमांत जिलों से संबंधित है। माना जा रहा है कि पहाड़ की,तुलना में सदन में देहरादून, हरिद्वार और यूएस नगर जिलों की विधानसभा के विधायकों की आमद ज्यादा रहेगी।

विधायकों को जारी की एडवाइजरी
विधानसभा सचिवालय से स्पीकर की ओर से विधानसभा सदस्यों को भी कोरोना वायरस को लेकर एक एडवाइजरी जारी की गई है। जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग के अलावा मुंह पर मास्क लगाने के साथ ही बार बार हाथ धोने और सभी जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।

भराड़ीसैंण से शुरुआत, देहरादून में समापन

भराड़ीसैंण में ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा कर बजट सत्र को ऐतिहासिक बनाने की कोशिश कोरोना संक्रमण के चलते सिमट गई। यह पहली बार होगा कि प्रदेश सरकार
ने बजट सत्र की शुरूआत कहीं और की और बजट कहीं और पास कराया। बजट सत्र को लेकर इस बार शुरूआत मेें पक्ष और विपक्ष के बीच खासी तनातनी रही। विपक्ष के तीखे तेवर को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर ढीला कर दिया।

विपक्ष इससे उबर पाता इससे पहले ही कोरोना संक्रमण के कारण सारी स्थितियां ही बदल गई। भराड़ीसैंण की जगह देहरादून में बजट पास कराना तय किया गया और तीन दिन का यहां होने वाला सत्र भी एक दिन की कार्यवाही तक सिमट गया। विभागों के बजट पर चर्चा भी इस कारण अधर में लटक गई।

वभागों के बजट पर चर्चा के दौरान ही विभागों के मंत्रियों को कई बार खासी परेशानी का सामना भी करना पड़ता था। विपक्ष ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए सत्ता पक्ष की लगभग हर बात को स्वीकार करने की दरियादिली भी दिखाई। प्रदेश सरकार के सामने मुसीबत ये भी थी कि एक अप्रैल से पहले बजट पास कराना जरूरी था। विपक्ष ने भी सरकार की इस मुश्किल को समझा।

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