देहरादून I देहरादून में इंदिरा गांधी नेशनल फॉरेस्ट एकेडमी के तीन ट्रेनी आईएफएस अफसरों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद यह जांच की जा रही है कि तीनों स्पेन में कहां कोरोना वायरस से संक्रमित हुए। एकेडमी के अधिकारियों ने उन सभी ट्रेनी अफसरों से पूछताछ की है जो प्रशिक्षण लेने स्पेन गए थे।
एकेडमी के अधिकारियों के मुताबिक अभी यह जानकारी नहीं हो पाई है कि तीनों किन परिस्थितियों में संक्रमित हुए। एकेडमी के एडीशनल डायरेक्टर एसके अवस्थी ने बताया कि सभी ट्रेनी आईएफएस अफसरों से इस संबंध में पूछताछ की गई थी लेकिन इस बात की जानकारी नहीं मिल पाई थी कि वे कोरोना वायरस से कहां संक्रमित हुए। किसी को वायरस से संक्रमित होने की जानकारी भी नहीं हो सकी।

अब जांच में यह बात सामने आई है कि पहले एक ट्रेनी अफसर वायरस के संक्रमण में आया और उसी की वजह से उसके दो साथी भी संक्रमित हो गए। तीनों अफसर उस दिन में एक ही कमरे में ठहरे हुए थे। ऐसे में तीनों को संक्रमण हो गया। अवस्थी का यह भी कहना है कि चौंकाने वाली यह बात यह है कि सभी ट्रेनी अफसरों ने एक साथ एक ही हवाई जहाज में वापसी की और कई दिनों तक साथ-साथ रहे, इसके बावजूद बाकी को कोरोना का संक्रमण नहीं हुआ। यह राहत की बात है।

तीन दिन पहले वापस बुला लिए थे अफसर

स्पेन में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैलने के कारण केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वहां पहुंचे ट्रेनी आईएफएस अफसरों को तीन दिन पहले ही देश वापस बुला लिया था। यदि मंत्रालय कीओर से थोड़ी सी देर हो जाती तो हालात बेहद खराब हो सकते थे। अधिकारियों में यह चर्चा आम है कि बड़े मोदी सरकार देशहित मेें फैसले लेने में देर नहीं लगाती है। देश को इसका फायदा भी होता है।

एकेडमी के अधिकारियों के अनुसार यदि स्पेन दौरे पर गए अधिकारी तीन दिन और रुक जाते तो इनमें से कई को कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा था।  इंदिरा गांधी नेशनल फॉरेस्ट एकेडमी के एडिशनल डायरेक्टर एसके अवस्थी ने बताया कि स्पेन दौरे पर गए अफसरों को 28 फरवरी से 13 मार्च तक स्पेन में रहना था लेकिन जैसे ही स्पेन में कोरोना वायरस के चलते मौतों का सिलसिला तेज हुआ तो इसकी जानकारी मिलते ही मंत्रालय के अफसरों ने सभी ट्रेनी आईएफएस अफसरों को देश वापस बुला लिया।

इसके लिए 13 मार्च के हवाई जहाज के टिकट निरस्त कराए गए। उनकी जगह आनन-फानन में 10 मार्च के टिकट कराने पड़े जिसमें मंत्रालय को काफी बजट भी खर्च करना पड़ा। इतनी तेजी दिखाने के बावजूद तीन अफसरों को वायरस ने अपनी चपेट में ले लिया। अवस्थी का मानना है कि यदि अफसरों को तीन  दिन और स्पेन में ही रोका जाता तो स्थिति और खराब हो सकती थी। जिन अफसरों को वायरस का संक्रमण हुआ था वह अब काफी हद तक ठीक हैं।
Share To:

Post A Comment: