सभी देशवासियों किसानों व मजदूरों व गरीबों की सुनो,,,,,,
ऊपरवाला हम सबकी सुनेगा ,,,,,,,,,,
सरकारें राहत देंगी तो अन्नदाता अपने खून पसीने की कमाई से सबकी झोली खुशियां और तरक्की से भर देगा। हमारे देश की अर्थव्यवस्था को 70% किसान चला रहा है। जिसमें मजदूरों का मुख्य योगदान है।हमारे देश की सीमाओं की रक्षा करने वाला जवान 60% किसान का बेटा है। सहनशीलता इंसानियत मान मर्यादा भारतीय संस्कृति ईमानदारी कूट कूट कर किसानों के रोम रोम में बसी है। किसान मेहनत और खून पसीने की कमाई करता है।सबसे बड़ा परोपकारी है।जो पुण्य का या सवाब का काम करता है।भारत देश की इमेज अन्नदाता ने विदेशों में लोकप्रिय बनाई है।पेड़,पौधे,फर्नीचर,रंगीन कलर,दूध,अनाज,फल सब्जी,जड़ी, बूटिया, मीट, चमड़ा,जैविक व कंपोस्ट खाद,काजू ,पिसता, बादाम,आदि पैदा करता है। अपने परिवार का पालन कर देश के कोने कोने में सभी की जरूरतों की पूर्ति कर विदेशों में किसान संबंधित वस्तुएं निर्यात की जाती हैं। उसके बदले विदेशों से भारतीयों की आवश्यक वस्तुएं आयात होती हैं। विदेशों में संबंध अच्छे होने के अनुसार देश को तरक्की के रास्ते पर किसान अग्रसर कर रहा है।किसान की कोई जात नहीं किसान हमारे देश का गौरव है। किसान और मजदूर हर द्वेष भावना से दूर रहकर सबका भला कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा है।किसान अपनी भलाई के लिए सरकार चुनता है।किसान के साथ में विश्वासघात ही होता है। दुर्भाग्य है।किसान अपने माल की कीमत नहीं लगा सकता किसान को अनुदान देने के नाम पर केवल छला जाता है। किसान सुविधाओं में बहुत बड़ा अभाव दिखाई देता है। पिछले कई सालों से महंगाई की मार लगभग 35% किसानों पर पड़ी है। लगभग लाभ 9% मिला है।हर साल किसान कर्ज में डूबा रहता है। मौसम की आफत महंगाई की आफत सरकारों के झूठे वादे आवारा पशु कीड़े मकोड़े आदि की वजह से किसान आत्महत्या लगातार करता आ रहा है। दर्द उसी को होता है।जिसे चोट लगती है। खेती करते किसान रिटायर होने पर कोई अनुदान नहीं जंगल में किसी जानवर या कीड़े मकोड़े या बिजली से या अचानक मृत्यु पर कोई अनुदान या धनराशि नहीं जबकि सभी सरकारी मुलाजिमों को किसी भी प्राइवेट कंपनी या बंधुआ मजदूरों को अनुदान धनराशि दी जाती है। धूप या सर्दी किसी भी परिस्थिति में अन्नदाता अपने काम को ईमानदारी के साथ अंजाम देता है। सबसे मजेदार बात यह भी है।खेत या आदि जगह पर अपने हिस्से का किसान खाना खा रहा है। दूसरा सज्जन किसान के पास आ गया तो अपने हिस्से का आधा खाना खुशी से दे देता है।दुर्भाग्य अन्नदाता अपने हक की आवाज उठाता है।तो लाठी गोलियों संगीन धाराओं से अन्नदाता का अपमान किया जाता है। जमीन अधिग्रहण हो सरकारी लोन हो अपने माल की कीमत हो आदि अन्नदाता के दर्द के आंसू जब निकलते हैं।तो शायद ऊपर वाले की आंख में आंसू शायद आते होंगे लेकिन सत्ता पर बैठे हुए चुनिंदा लोग अन्नदाता को कायर बेईमान न जाने किस-किस नामों से पुकार कर किसानों का अपमान करते हैं। जबकि सरकार बनाने में लगभग 60% किसानों का योगदान होता है।सभी को समझना होगा किसान हमारे देश की रीढ़ है।एसी कमरों में बैठे लोग या बहुत सारी सुविधाएं लेकर मालामाल लोग तरक्की या ऊर्जावान नहीं हो सकते देश की तरक्की सबकी भलाई पुण्य या शबाब करने में अन्नदाता से बड़ा कोई नहीं मेरी इन सभी बातों से कितने सज्जन सहमत या असहमत हैं।सबकी सोच अपनी अपनी मगर यह कड़वी सच्चाई है।विदेशों में अलग-अलग तिथि में किसान दिवस मनाया जाता है।भारत में 12 अक्टूबर व 23 दिसंबर को मनाया जाता है।किसान मसीहा देश के पांचवें पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी ने 1952 में यूपी के मुख्यमंत्री रहने पर किसानों को अधिकार दिलाने का प्रस्ताव पास कराया उसके बाद पूरे देश में लागू किया गया किसान मसीहा की 23 दिसंबर पुण्यतिथि के अवसर पर किसान दिवस मनाया जाता है/17/4/2020/ अंतर्राष्ट्रीय किसान दिवस पर विश्व के सभी किसान बुजुर्गों और नौजवान साथी माताएं बहने तथा सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई

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