देहरादून I देहरादून में 11 साल पहले दो पुलिसकर्मियों ने एक युवक को चरस के झूठे मुकदमे में फंसाया था। मुकदमे के ट्रायल में जब कहानी से परदा उठा तो स्पेशल एनडीपीएस जज सुबीर कुमार की कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया। इसके साथ ही दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ दंडात्मक और अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश भी दिए। अदालत में सिद्ध हुआ कि दोनों पुलिसकर्मी सगे भाई हैं और विरोधियों के साथ मिलकर युवक पर झूठा केस बनाया था।
उसमें से एक युवक बैग लेकर उतर रहा था। संदिग्ध जानकर पुलिस ने उसे रोका तो वह नहीं रुका। इस पर उसे भागकर पकड़ा गया। अनवर निवासी श्यामीवाला मंडावली बिजनौर नाम के युवक से बरामद बैग में एक पॉलीथिन की थैली में काले रंग का बत्तीनुमा पदार्थ था, जिसे सूंघ और तोलकर पता चला कि यह 1.40 किलो चरस है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट आने पर पुलिस ने 22 जून 2009 को अनवर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। अभियोजन पक्ष ने इस मुकदमे में कुल 10 गवाह प्रस्तुत किए। इधर, अनवर ने खुद को बेकसूर बताते हुए बयान दिए कि कांस्टेबल अरशद व हसन ने उसे कोटावाली नदी (हरिद्वार जिले में यूपी और उत्तराखंड बॉर्डर) से जबरन कार सहित उठाया था। इसके पक्ष में बचाव पक्ष ने भी आठ गवाह प्रस्तुत किए। पता चला कि अनवर के परिजनों ने उसी दिन मंडावली (जिला बिजनौर) थाने में रिपोर्ट भी दर्ज कराई। यहां हसन और अरशद के खिलाफ अपहरण का मुकदमा भी दर्ज कर लिया गया।
मुकदमे के ट्रायल में अभियोजन पक्ष पुलिस की कहानी को सिद्ध नहीं कर पाया। जबकि, बचाव पक्ष की कहानी से यह सिद्ध हुआ कि हसन और अरशद दोनों सगे भाई हैं। वे दोनों अनवर के विरोधियों से मिले और उसका कोटावाली नदी के पास से अपहरण कर देहरादून क्लेमेंटटाउन थाना क्षेत्र में गिरफ्तारी दिखा दी। न्यायालय ने अनवर को बरी करते हुए पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड को दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।


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