इसकी सूचना ऊर्जा निगम को दी गई थी। स्थानीय जनता की मांग पर विभाग ने गांव के लिए ट्रांसफार्मर तो भिजवाया, लेकिन बर्फीला रास्ता और खड़ी चढ़ाई होने से ठेकेदार सड़क से 200 मीटर दूरी पर ही ट्रांसफार्मर छोड़कर चला गया, जबकि गांव यहां से करीब छह किमी दूर था।
कुछ दिन इंतजार के बाद भी जब ऊर्जा निगम ट्रांसफार्मर को गांव तक पहुंचाने की व्यवस्था नहीं करा पाया तो ग्रामीणों ने खुद ही ट्रांसफार्मर को गांव तक पहुंचाने का निर्णय लिया। गांव के करीब 35 लोग एकत्र हुए और ट्रांसफार्मर को डंडों से बांधकर एक ही दिन में गांव तक पहुंचा दिया।
छह किमी रास्ता बर्फ से पटे होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। ट्रांसफार्मर गांव में पहुंचने के बाद निगम ने गांव में बिजली आपूर्ति सुचारु कर दी। इस दौरान विशेर रावत, संजय रावत, विनोद कुंवर, कुंवर नेगी, पंचम सिंह, पवन राणा, गणेश नेगी, प्रदीप रावत, बीरेंद्र फरस्वाण और अनिल फरस्वाण आदि मौजूद थे।
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