देहरादून I कोरोना वायरस को महामारी घोषित करने से सरकार संक्रमित व्यक्ति का फ्री इलाज करेगी। इसके लिए यह जरूरी नहीं है कि फ्री इलाज के लिए संक्रमित मरीज के पास अटल आयुष्मान योजना का गोल्डन कार्ड होना चाहिए। जो भी व्यक्ति वायरस से संक्रमित है, उसे आईसोलेशन और उनके संपर्क में आए लोगों को क्वारेंटाइन एरिया में निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रही है।
कोई भी रोग महामारी घोषित होने पर सरकार ही उसके इलाज का पूरा खर्च उठाती है। अटल आयुष्मान योजना में प्रदेश के 23 लाख परिवारों को पांच लाख तक मुफ्त इलाज की सुविधा है। लेकिन दूसरे राज्य का जो व्यक्ति में प्रदेश में रह रहा है उसका भी वायरस संक्रमित होने पर सरकार फ्री इलाज करेगी। कोरोना वायरस के केस में संक्रमित मरीज के पास आयुष्मान योजना का गोल्डन कार्ड हो या न हो। उसका पूरा इलाज निशुल्क किया जाएगा। 

संक्रमण रोकने को विभाग स्वयं कर रहा तलाश
चीन या अन्य कोरोना वायरस प्रभावित देशों से आने वाले लोगों की स्वास्थ्य विभाग स्वयं तलाश कर रहा है, ताकि वायरस के संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के प्रशिक्षु अधिकारियों व अन्य कर्मचारियों के 27 सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। 

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए इलाज निशुल्क है। इसमें आयुष्मान योजना का कार्ड होने या न होने की बात ही नहीं है, जिस भी व्यक्ति में वायरस के लक्षण पाए जाएंगे, उसके सैंपल जांच के लिए भेजा जा रहा है। जांच में वायरस की पुष्टि होने पर संक्रमित व्यक्ति को कड़ी निगरानी में आईसोलेशन की सुविधा दी जा रही है।
 -डॉ. पंकज कुमार पांडेय, प्रभारी सचिव स्वास्थ्य

आयुष्मान योजना के हेल्थ पैकेज में पहले से ही फ्लू से संबंधित बीमारियों के इलाज की व्यवस्था है। इसके लिए गोल्डन कार्ड होना जरूरी है, लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण सरकार की ओर से सभी को मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है।
-डीके कोटिया, अध्यक्ष, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण

उत्तराखंड में फर्स्ट स्टेज में कोरोना वायरस

जानलेवा कोरोना वायरस उत्तराखंड में फर्स्ट स्टेज में है। सरकार की कोशिश है कि वायरस को तीसरे व चौथे स्टेज तक पहुंचने से रोका जाए। इसके लिए सरकार हरसंभव कदम उठा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने वायरस से बचने के लिए लोगों को सामाजिक दूरी बनाने की सलाह दी है। चीन व अन्य प्रभावित देशों से आए 712 लोगों को निगरानी में रखा गया है। 

बुधवार को स्वास्थ्य निदेशालय में अपर सचिव एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मिशन निदेशक और स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अमिता उप्रेती ने संयुक्त प्रेसवार्ता में प्रदेश में कोरोना वायरस को रोकने के लिए की गई व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वायरस फैलने के चार स्टेज है। इसमें पहला प्रभावित देशों की यात्रा कर लौटे व्यक्ति में संक्रमण, दूसरा संक्रमित व्यक्ति से स्थानीय स्तर पर एक से दूसरे में फैलना, तीसरा कम्युनिटी में फैलना और चौथा एपिडेमिक (महामारी) की स्थिति है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उत्तराखंड में अभी वायरस का संक्रमण फर्स्ट स्टेज में है। 

प्रदेश में अब तक वायरस की जांच के लिए 78 सैंपल लिए भेजे गए। जिसमें 28 सैंपल निगेटिव और एक मामला पॉजिटिव पाया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने सतर्क किया कि कोई भी व्यक्ति आईसोलेशन वार्ड में न जाएं। इससे वायरस फैलने का खतरा हो सकता है। इस मौके पर नोडल अधिकारी डॉ. पंकज सिंह, जनसंपर्क अधिकारी जेसी पांडेय भी मौजूद रहे।

दवाइयों व उपकरणों के लिए विभाग को 60 करोड़ जारी
वायरस को रोकने के लिए सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को 60 करोड़ की राशि जारी कर दी है। इस धनराशि से दवाइयां, उपकरण के साथ ही प्रदेश भर में आईसोलेशन वार्डों की व्यवस्था की जाएगी। वहीं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने भी मास्क, दवाइयों व अन्य चिकित्सा सुविधा के लिए बजट खुला रखा है। 

सोशल मीडिया पर भ्रांति न फैलाएं
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. उप्रेती ने कहा कि वायरस को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रांति न फैलाएं। प्रदेश में एक पॉजिटिव केस के अलावा कोई भी दूसरा मामला सामने नहीं आया है। विभाग की ओर से पूरी सतर्कता बरती जा रही है। 

दून और गांधी अस्पताल में बढ़ाए जाएंगे आईसीयू बेड
कोरोना वायरस से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में 337 आईसोलेशन बेड की व्यवस्था की है। दून और गांधी अस्पताल में आईसीयू बेड की संख्या बढ़ाई जा रही है। प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी वेंटीलेटर और आईसीयू बेड बढ़ाए जाएंगे।
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