देहरादून । सीधी भर्ती के आरक्षण रोस्टर पर छिड़ी रार से प्रदेश सरकार की दुविधा बढ़ गई है। आरक्षित और सामान्य वर्ग के कर्मचारियों के बीच रोस्टर को लेकर सहमति बनाना उसके लिए कठिन चुनौती माना जा रहा है। रोस्टर के परीक्षण को लेकर मंगलवार को हुई बैठक में आरक्षित और सामान्य वर्ग के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों ने कौशिक समिति को दो टूक अंदाज में चेता दिया। 
उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन ने साफ कहा कि उसे रोस्टर में किसी भी तरह का बदलाव मंजूर नहीं होगा। सरकार ने संशोधन किया तो एसोसिएशन इसके खिलाफ आंदोलन छेड़ देगी। उधर, उत्तराखंड एससी एसटी इंप्लाइज फेडरेशन ने भी नए रोस्टर को सिरे से खारिज कर कमेटी से पुराना रोस्टर लागू करने की मांग की है। ऐसा न होने पर फेडरेशन ने कहा कि ये आरक्षित वर्ग से अन्याय होगा और इसे किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जाएगा। 
 

इस कारण अब प्रदेश सरकार दुविधा में आ फंसी है। रोस्टर की पहेली को हल करने का जिम्मा कौशिक समिति को सौंपा गया है। मंगलवार को विधानसभा में कौशिक समिति की बैठक हुई। समिति के दो सदस्य कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और राज्यमंत्री रेखा आर्य निजी व्यस्तता के कारण बैठक में नहीं आए। 

समिति के अध्यक्ष मदन कौशिक ने अपने कार्यालय कक्ष में दोनों पक्षों के नेताओं को बारी-बारी से आमंत्रित किया और उनका पक्ष सुना। जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक जोशी के नेतृत्व में ठाकुर प्रहलाद सिंह, पंचम सिंह बिष्ट, राकेश जोशी, हीरा सिंह बसेड़ा, डीएस असवाल व राजेंद्र सिंह चौहान शामिल थे।

एसोसिएशन ने कहा कि रोस्टर में पहला पद सामान्य वर्ग का है। उस पद से किसी भी तरह की छेड़छाड़ न की जाए। साथ ही यह भी कहा कि एससी का कोटा 19 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।

इसके बाद समिति की उत्तराखंड एससी एसटी इंप्लाइज फेडरेशन के नेताओं के साथ बैठक हुई। फेडरेशन का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष करम राम ने किया। उनके साथ फेडरेशन के मटन लाल, कांता प्रसाद, प्रेमपाल सिंह और योगेंद्र सिंह पांगती भी मौजूद थे। उन्होंने पुराने रोस्टर में संशोधन के औचित्य पर सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि रोस्टर के लागू होने से सामान्य वर्ग का कोटा प्रभावित हो रहा था। सरकार के पास ऐसे कई आंकड़े हैं। उन्होंने चिंता जाहिर की कि रोस्टर में पहले स्थान से अनुसूचित जाति का पद हटाकर छठे स्थान पर करने से इस वर्ग को भारी नुकसान होगा। उन्होंने समिति से मांग की कि वह रोस्टर में पूर्व की भांति पहले स्थान पर एससी को रखें।

ऐसा न होने पर ये वर्ग नौकरियों से महरूम हो जाएगा। इसका असर बैक लॉग के पदों पर भी पड़ेगा। कौशिक ने दोनों पक्षों के नेताओं को सुझावों को सुना। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी, प्रमुख सचिव न्याय समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

इनका क्या कहना है

सामान्य और आरक्षित वर्ग के कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों का समिति ने पक्ष जान लिया है। अब समिति सचिव स्तर के अधिकारियों के साथ बैठक करेगी। इस बैठक के बाद समिति अपनी सिफारिशें प्रदेश मंत्रिमंडल को सौंप देगी। - मदन कौशिक, कैबिनेट मंत्री

हमने समिति को साफ कह दिया है कि आरक्षण रोस्टर में पहला पद सामान्य का ही होना चाहिए।  आरक्षण का कोटा भी 19 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए। रोस्टर से पहला पद हटाया गया तो इसे सहन नहीं किया जाएगा। -दीपक जोशी, प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन

हमें आरक्षण रोस्टर में न दूसरा पद चाहिए न तीसरा। हमने समिति को साफ कर दिया है कि हमें पहले स्थान पर एससी का पद चाहिए। ये आरक्षित वर्ग भावी पीढ़ी के भविष्य का सवाल है। इससे हम समझौता नहीं कर सकते। -करम राम, प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड एससी एसटी इंप्लाइज फेडरेशन
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