यह पोस्ट जागरूकता के नज़रिये से भी आप पढ़िये क्योंकि कहीं भी आपको कोई जानवर इस अवस्था मे मिले जिसे इलाज की ज़रूरत हो तो आप कम से कम इसकी सूचना पषु अस्पताल के कर्मचारियों तक तो पहुंचा  ही सकते है।

शादाब जो एक बिजनेसमेन है, इनकी बेटी सैंटमैरी स्कूल में पढ़ती है यह अपनी बेटी को स्कूल से लेकर वापस लौट रहे थे तभी इनकी बेटी ने कहा पापा वो देखो, वो र्हास के चोट लगी हुई है प्लीज़ उसे बचा लो। यह बात षादाब के दिल में बैठ गई। वो उसी उधेड़बुन में थे कि आखिर किस तरह इस घोड़े का उपचार किया जाये। उन्होने अपने दोस्त ज़ीशान  नजीबाबादी को यह बात बताई । दोनो तुरन्त सैंटमैरी काॅलोनी पहुंचे जहां जख्मी घोड़ा खड़ा हुआ था। समाजसेवी ज़ीशान नजीबाबादी ने सोषल मीडिया के माध्यम से लाईव वीडियो चलाकर लोगों से मदद करने के लिए कहा। तारिक एडवोकेट ने सीएमओ कार्यालय से जानकारी प्राप्त करके नजीबाबाद
पशु  अस्पताल के सम्पर्क नम्बर लिये। प्रेमधाम आश्रम के राजीव शर्मा ने इसकी सूचना पशु अस्पताल के कर्मचारियों तक पहुंचाई। सोषल मीडिया के माध्यम से इतिहासकार तैययब अली ने मदद करते हुए पशु  हैल्प लाइन के दो नम्बर 18001801541 और 05222741991 निषुल्क नम्बर उपलब्ध करवायें। 

इन नम्बरों पर काॅल करने पर मुख्य पशु  चिकित्साधिकारी डा0 भूपेन्द्र सिंह से बात हुई उन्होने उपमुख्य पशु  चिकित्साधिकारी डा0 विनोद कुमार नजीबाबाद का सम्पर्क नम्बर 9412475040 दिया। इसी के साथ एक फेसबुक मित्र कपिल नामदेव ने पषु अस्पातल नजीबाबाद के पंकज वर्मा का नम्बर 8449848952 दिया जिनसे बात करने पर डा0 विनोद कुमार ने एक टीम मौके पर भेजी जहां ज़ख्मी घोड़ा था। घोड़े का एक पैर बुरी तरह से ज़ख्मी था जिसमे से खून बह रहा था जिसमें कीेड़े पड़ गये थे। पंकज वर्मा और बलवन्त सिंह ने घोड़े का उपचार किया, पट्टी करी व दर्द और इंफेक्षन के इंजेक्षन लगाये व घोड़े को रोटी में मिलाकर कीड़े खत्म करने वाली दवा खिलाई तथा ज़ख्मी घोड़े का उपचार किया।

इस कार्य में फेसबुक मित्रों में इमरान अंसारी, अयाज़ बख्तियार, शादाब, षहज़ाद, परवेज़ कादरी, एड ईलू रेहान, साकिब इत्यादि ने घोड़े के मालिक के ऊपर नाराज़गी व्यक्त करी कि कैसे काम निकलने पर घोड़ो को मरने के लिए छोड़ दिया जाता है जब तक वह काम करते हैं उन्हे अपने पास रखते हैं बाद में उनकी परवाह तक नही करते।
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